'आदिकाल' टिप्पणी
1000 ई. से 1400ई. तक के काल को रामचंद्र शुक्ल ने आदिकाल कहा है.
आदिकाल में अपभ्रंश डिंगल के अलावा खडी़ बोली और मैथिली में रचनाएँ हुई. खडी़ बोली का रूप अमीर खुसरो की रचनाओं में मिलता है. मैथिली बिहार की मैथिल जनपद में बोली जाती है और यह हिन्दी की विभाषा मानी जाती है. विद्यापति की पदावली हिन्दी की अमूल्य निधि मानी जाती है. इस काल के अनेक रचयिता राजाओं के आश्रय में रहते थे. इसलिए परिस्थिति वश उन्हें राजाओं के गुणगान करना पड़ता था. उनकी वीरता का वर्णन करना पड़ता था. चंदबरदाई ने ' पृथ्वी राज रासो' में पृथ्वी राज के शौर्य का वर्णन किया है. चूंकि इस काल में स्त्रियों का अपहरण होता था इसलिए इसे श्रृंगार का भी वर्णन हुआ है. 🌷🌷
गौरव मिश्रा
Very good
ReplyDeleteVery good
ReplyDelete